07 July 2006

परिचय

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उनका तो दर्शन था— न दैन्यं न च पलायनम् ........... न दीनता स्वीकार करूँगा और न हारकर समाज से भागूँगा...... यह है निराला का व्यक्तित्व....... डॉ॰ रामविलास शर्मा की ये पंक्तियाँ कितनी सटीक हैं निराला पर—

यह कवि अपराजेय निराला
इसको मिला गरल का प्याला
थका और तन टूट चुका है
पर जिसका माथा न झुका है
थकी त्वचा दलदल है छाती
लेकिन अभी सँभाले थाती
और उठाए विजय पताका
यह कवि है अपनी जनता का।
(डॉ॰ रामविलास शर्मा)

दुर्लभ चित्र

विविध लिंक-1

08 May 2005

विविध लिंक

26 April 2005

वृक्ष

पहली पंक्ति लिखी विधि ने जिस दिन कविता की
उस दिन पहला वृक्ष स्वयं उत्पन्न हो गया
प्रथम काव्य है वृक्ष विश्व के पहले कवि का ।

  • रामधारी सिंह दिनकर

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