07 July 2006

परिचय

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उनका तो दर्शन था— न दैन्यं न च पलायनम् ........... न दीनता स्वीकार करूँगा और न हारकर समाज से भागूँगा...... यह है निराला का व्यक्तित्व....... डॉ॰ रामविलास शर्मा की ये पंक्तियाँ कितनी सटीक हैं निराला पर—

यह कवि अपराजेय निराला
इसको मिला गरल का प्याला
थका और तन टूट चुका है
पर जिसका माथा न झुका है
थकी त्वचा दलदल है छाती
लेकिन अभी सँभाले थाती
और उठाए विजय पताका
यह कवि है अपनी जनता का।
(डॉ॰ रामविलास शर्मा)

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